जय आर्यवर्त ओह्म जय हिंद
मुझे पढिये तो सही मै महर्षि दयानंद के हदय की अनुपम करुणाकर की क्रुति हुं।
मुझे पढिये तो मेरा नाम सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ? मै अनार्षग्रन्थ अज्ञान अविधा और अंधविश्वास को हठाकर एक आर्ष जीवन उदय को जन्म देता हूं। मै पूर्वज मानव संसार के उदय की जाखी करता हु। मै जीव प्रकृति और इश्वर लक्षण भेद की देता हु परख। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ?मै महापुरुषोके लक्षण भेद परखता हु और महापुरुष बनानेकी क्षमता और प्रेरणा धारण करता हूं। मैने कितने महापुरुषोको जन्म दिया और मेने कितने दंभी,ढोगी,पाखंडी,अंधविश्वास का उन्मूल किया। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा किया प्रयोजन है? मै मानव संसार के सहयोगी सुख परक एकता उन्नतिका अहम गुण धर्म के वेद ज्ञान का प्रेरक हु। मेरा फैलना भ्रष्ट कथित धर्म , तांत्रिक दंभी ढोगी को जचता नही क्यों ?मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ?मै मानव समाज को गुमराह होने से बचाना चाहता हूँ। मै भूले हुए ,भटके हुए बेहोश ,दिशाशुन्य और अज्ञान अविधा की निद्रा में सोये हुए को जगाना चाहता हू। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है?मै जिज्ञाशु आत्मामे ह्द्यग्रुथ हो जाता हूं वह हर प्रकारसे अंधविश्वास से मुक्त हो जाता है। जो नास्तिक है वह आस्तिक बन जाता है। और सही दिशामे इश्वर का सहयोगी वरदान पाता है। मै शारिरीक आत्मिक,शामाजिक और व्यकितसे लेकर समस्त संसार के कल्याणी उन्नति के दीर्ध द्रष्टा का बौध की जाखी करता हूं। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ?मुझे ह्द्यग्राह्य करनेवाला हर दुःख और सुख के कारणों का भेद जानता है ,और अभय निर्भय बनकर स्वाभिमानी बनकर द्रुष्ट दंभी प्रभावी राक्षसो की समाजसे मुक्त करता हूं। मुझे ह्द्यग्राहय करनेवाला इश्वर वरदान पाकर द्रष्टा श्रोता और कर्ता विधाता बनकर आर्ष ,अनार्ष,ज्ञान,अज्ञान ,विधा -अविधा और संसार के इतिहास का सर्व भेद पाकर दर्शन शास्त्र के स्वरूप दीर्ध द्रष्टा बन जाता है। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ?मै विश्व में विश्व महापुरुषों की लाइब्रेरी ग्रंथ के अनोखा ज्ञानवर्धक पुस्तक बन पाया हूं। मै मतपंथ साप्रदाय ,जातिवाद ,भाषावाद से पर करवाता हूं समस्त मानव संसार के दूषित कलेष मिटाता हूं। और अहम ब्रह्मास्मी अदैतवादी है नास्तिकवादी है ,पौराणीकत प्रलायनवादी है निराशावादी है उसे समाप्त करके सहयोगी आशा का अनुपम ज्ञानविधा के सहयोगी सुख का भंडार की राह दिखता है। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मर क्या प्रयोजन है ?मै कहु जयन्ति के सुर में ऋषि दयानंद की आशा दिखता हु वेद राह की। लेखक
जयन्तिभाईआर्य
jayantiary15 @gmail.com
मुझे पढिये तो सही मै महर्षि दयानंद के हदय की अनुपम करुणाकर की क्रुति हुं।
मुझे पढिये तो मेरा नाम सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ? मै अनार्षग्रन्थ अज्ञान अविधा और अंधविश्वास को हठाकर एक आर्ष जीवन उदय को जन्म देता हूं। मै पूर्वज मानव संसार के उदय की जाखी करता हु। मै जीव प्रकृति और इश्वर लक्षण भेद की देता हु परख। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ?मै महापुरुषोके लक्षण भेद परखता हु और महापुरुष बनानेकी क्षमता और प्रेरणा धारण करता हूं। मैने कितने महापुरुषोको जन्म दिया और मेने कितने दंभी,ढोगी,पाखंडी,अंधविश्वास का उन्मूल किया। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा किया प्रयोजन है? मै मानव संसार के सहयोगी सुख परक एकता उन्नतिका अहम गुण धर्म के वेद ज्ञान का प्रेरक हु। मेरा फैलना भ्रष्ट कथित धर्म , तांत्रिक दंभी ढोगी को जचता नही क्यों ?मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ?मै मानव समाज को गुमराह होने से बचाना चाहता हूँ। मै भूले हुए ,भटके हुए बेहोश ,दिशाशुन्य और अज्ञान अविधा की निद्रा में सोये हुए को जगाना चाहता हू। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है?मै जिज्ञाशु आत्मामे ह्द्यग्रुथ हो जाता हूं वह हर प्रकारसे अंधविश्वास से मुक्त हो जाता है। जो नास्तिक है वह आस्तिक बन जाता है। और सही दिशामे इश्वर का सहयोगी वरदान पाता है। मै शारिरीक आत्मिक,शामाजिक और व्यकितसे लेकर समस्त संसार के कल्याणी उन्नति के दीर्ध द्रष्टा का बौध की जाखी करता हूं। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ?मुझे ह्द्यग्राह्य करनेवाला हर दुःख और सुख के कारणों का भेद जानता है ,और अभय निर्भय बनकर स्वाभिमानी बनकर द्रुष्ट दंभी प्रभावी राक्षसो की समाजसे मुक्त करता हूं। मुझे ह्द्यग्राहय करनेवाला इश्वर वरदान पाकर द्रष्टा श्रोता और कर्ता विधाता बनकर आर्ष ,अनार्ष,ज्ञान,अज्ञान ,विधा -अविधा और संसार के इतिहास का सर्व भेद पाकर दर्शन शास्त्र के स्वरूप दीर्ध द्रष्टा बन जाता है। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मेरा क्या प्रयोजन है ?मै विश्व में विश्व महापुरुषों की लाइब्रेरी ग्रंथ के अनोखा ज्ञानवर्धक पुस्तक बन पाया हूं। मै मतपंथ साप्रदाय ,जातिवाद ,भाषावाद से पर करवाता हूं समस्त मानव संसार के दूषित कलेष मिटाता हूं। और अहम ब्रह्मास्मी अदैतवादी है नास्तिकवादी है ,पौराणीकत प्रलायनवादी है निराशावादी है उसे समाप्त करके सहयोगी आशा का अनुपम ज्ञानविधा के सहयोगी सुख का भंडार की राह दिखता है। मुझे पढिये तो सही मेरा नाम है सत्यार्थ प्रकाश मर क्या प्रयोजन है ?मै कहु जयन्ति के सुर में ऋषि दयानंद की आशा दिखता हु वेद राह की। लेखक
जयन्तिभाईआर्य
jayantiary15